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चालीसा संग्रह

श्री शीतला चालीसा

दोहा :- जय जय माता शीतला तुमही धरे जो ध्यान। होय बिमल शीतल हृदय विकसे बुद्धी बल ज्ञान।। > घट घट वासी शीतला शीतल प्रभा तुम्हार। शीतल छैंय्या शीतल मैंय्या पल ना दार।।

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श्री गायत्री चालीसा

॥दोहा॥ हीं श्रीं, क्लीं, मेधा, प्रभा, जीवन ज्योति प्रचण्ड। शांति, क्रांति, जागृति, प्रगति, रचना शक्ति अखण्ड॥ जगत जननि, मंगल करनि, गायत्री सुखधाम। प्रणवों सावित्री, स्वधा, स्वाहा पूरन काम॥ भूर्भुवः स्वः

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श्री विन्ध्येश्वरी चालीसा

|| दोहा || नमो नमो विन्ध्येश्वरी, नमो नमो जगदंब। संत जनों के काज में, करती नहीं बिलंब॥ || चौपाई || जय जय जय विन्ध्याचल रानी। आदि शक्ति जगबिदित भवानी॥ सिंह

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श्री परशुराम चालीसा

दोहा श्री गुरु चरण सरोज छवि, निज मन मन्दिर धारि। सुमरि गजानन शारदा, गहि आशिष त्रिपुरारि।। बुद्धिहीन जन जानिये, अवगुणों का भण्डार। बरणौं परशुराम सुयश, निज मति के अनुसार।।  

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श्री महावीर चालीसा

शीश नवा अरिहन्त को, सिद्धन करूँ प्रणाम। उपाध्याय आचार्य का, ले सुखकारी नाम। सर्व साधु और सरस्वती, जिन मन्दिर सुखकार। महावीर भगवान को, मन-मन्दिर में धार।   जय महावीर दयालु स्वामी, वीर प्रभु तुम

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श्री गिरिराज चालीसा

|| दोहा || बन्दहुँ वीणा वादिनी धरि गणपति को ध्यान | महाशक्ति राधा सहित, कृष्ण करौ कल्याण || सुमिरन करि सब देवगण, गुरु पितु बारम्बार | बरनौ श्रीगिरिराज यश, निज मति

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श्री बालाजी चालीसा

|| दोहा || श्री गुरू चरण चितलाय के धरें ध्यान हनुमान | बालाजी चालीसा लिखें दास स्नेही कल्याण || विश्व विदित वर दानी संकट हरण हनुमान | मेंहदीपुर प्रकट भये

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गुरु गोरख नाथ चालीसा

दोहा गणपति  गिरजा  पुत्र  को सुमिरु  बारम्बार  | हाथ  जोड़  बिनती  करू शारद  नाम  आधार ||   चोपाई  जय  जय  जय  गोरख  अविनाशी  | कृपा  करो  गुरुदेव  प्रकाशी  || जय

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विश्वकर्मा चालीसा

दोहा – श्री विश्वकर्म प्रभु वन्दऊँ, चरणकमल धरिध्य़ान । श्री, शुभ, बल अरु शिल्पगुण, दीजै दया निधान ।।   जय श्री विश्वकर्म भगवाना । जय विश्वेश्वर कृपा निधाना ।। शिल्पाचार्य

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।। श्री नवग्रह चालीसा ।।

चौपाई श्री गणपति गुरुपद कमल, प्रेम सहित सिरनाय। नवग्रह चालीसा कहत, शारद होत सहाय।। जय जय रवि शशि सोम बुध जय गुरु भृगु शनि राज। जयति राहु अरु केतु ग्रह