अन्न व्रत

अन्न व्रत

अन्न व्रत श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी को रखा जाता है। इस दिन विधिपूर्वक देवताओं, ऋषियों तथा पितरों की पूजा की जाती है। अन्न व्रत को सम्पूर्ण अन्न और संपत्तियों का उत्पादक माना जाता है।

अन्न व्रत विधि

नारद पुराण के अनुसार श्रावण मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी की समाप्ति से पहले दान देने के लिए कच्चा अन्न अलग- अलग बर्तनों में भिगो कर रख देना चाहिए। कुछ समय बाद भिगोए गए अन्न के पानी को फेंक देना चाहिए।

पंचमी के दिन सूर्य उदय के बाद स्नान आदि करके देवताओं, ऋषियों तथा पितरों की भली -भांति पूजा करनी चाहिए। उन्हें भिगोए हुए अन्न को चढ़ाना चाहिए और किसी शिव मंदिर में जाकर गंध, धूप, दीप ,फूल आदि से शिवलिंग की पूजा करनी चाहिए। इस दिन ब्राह्मणों को वस्त्र, धन, पकवान आदि दान देना चाहिए।

अन्न व्रत फल

मान्यता के अनुसार अन्न व्रत करने वाले मनुष्य के घर कभी अन्न की कमी नहीं होती है। इसके अलावा इस व्रत के शुभ फल से मनुष्य जीवन के सभी सुखों का भोग करके मृत्यु के बाद स्वर्ग लोक जाता है।

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