औलाद संबंधी सावधानियां व उपाय

औलाद संबंधी सावधानियां व उपाय

1. यदि बच्चे मरते हों या गर्भपात होते हों तो स्त्री के गर्भवती होते ही उसके बाजू पर लाल धागा बांध दे (स्त्री
के कद से 1” ज्यादा) यही धागा संतान होने के पश्चात बच्चे को बांधे और माता को नया धागा बांध दें जौ
11 महीने तक बांध कर रखें।
2. गणेश जी की अराधना करें।
3. गाय ग्रास मदद करेगा।
4. बच्चे के जनम से पहले एक बर्तन में दूध और दूसरे में खांड डालकर स्त्री का हाथ लगवा कर कायम करें
तथा बच्चे के जन्म के बाद दोनों वस्तुएं धर्म स्थान में पहुंचा दें । जिस बर्तन में दोनों चीज़ें रखें उनहें वापिस
मत लाएं।
5. यदि वर्षफल में राहु मंदा हो तो जौ का पानी बोतल में भरकर औरत के सिरहाने रखें, पैदाइश आराम से होगी।
6. यदि 100 दिन से अधिक समय के लिए घर से बाहर जाना हो तो नदी पार करते समय तांबे के सिक्के पानी
में फेंके।
7. दिन के समय मीठी तंदूरी रोटियां, जिन्हें लोहा न लगे, कुत्ते, दरवेश को खिलाएं।
8. यदि बच्चे पैदा होते ही मरते हों तो मीठी रोटीयों की जगह नमकीन रोटियां खिलाएं
9. धर्मस्थान में जन्में बालक की आयु लंबी होगी।
10. कुतिया का नर बच्चा जो अपने समय अकेला पैदा हुआ हो, रखने से (पालने से) परिवार में बरकत।

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