औषधि के रूप में रंगों का उपयोग

औषधि के रूप में रंगों का उपयोग

लाल रंग का प्रषव गर्म है। सूर्य, अग्नि, दीपक इन सबका रंग लाल है। इसलिए यह रंग गर्मी देता है। मिर्च पकने पर लाल हो जाती है और खूब गर्मी देती है। गिलास में पानी भर कर उसके ऊपर पारदर्शी लाल कागज लगा कर उसे लकड़ी के ऊपर आठ घंटे धूप में रख दिया जाए, तो यह पानी दवा का काम करता है, जो खांसी, जुकाम, सर्दी में लाभदायक है।
नीले रंग का प्रषव ठंडा है। गिलास में पानी भर कर, पारदर्शी नीला कागज लगा कर, आठ घंटे खुले में रख दिया जाए, तो ऐसा पानी पेट की जलन, पित्त, आदि में फायदा करता है।
हरा रंग पेट के रोगों के लिए हितकर है। गिलास में पानी भर कर, उस पर पारदर्शी हरा कागज लगा कर, लकड़ी के ऊपर रख कर, आठ घंटे धूप में रख दिया जाए, तो ऐसा पानी पेट के रोगों के लिए बहुत उत्तम होता है।
अल्ट्रा-वायलेट लैंप से सिकाई करने पर गर्दन, पीठ आदि के दर्द, जो ठंड लगने से होते हैं, फौरन ठीक हो जाते है| शरद पूर्णिमा की रात को खीर को, रात भर चंद्रमा की सफेद किरणों में रख कर खाया जाए, तो यह शक्तिवर्धक होती है। कार्तिक पूर्णिमा की रात को घी, बूरा और सफेद मिर्च मिला कर, चंद्रमा की किरणों में रख दिया जाए, तो यह मिश्रण नेत्र रोग में फायदा करता है। अरुणोदय की किरणों को हृदय पर लेने से हृदय रोग दूर होता है।
हरे रंग के कपड़े पहनने से पेट के रोगों में लाभ मिलता है। लाल रगं के कपड़े ठंड से बचाते हैं। नीले रंग के कपड़े गर्मी में पहनने चाहिएं। पीले रंग के कपड़े पीलिया, यकृत, तिल्ली आदि के रोगी के लिए अच्छे हैं। सफेद रंग के कपड़े मानसिक बीमारियों में उत्तम हैं। मटियाले कपड़े पहनने से चर्म रोगी को फायदा होता हैं।

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