आरती संग्रह

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श्री शाकुंभारी देवी जी की आरती

हरि ओं शाकुम्भर अम्बा जी, की आरती कीजो ऐसा अदभुत रूप हृदय धर लीजो शताक्षी दयालु की आरती कीजो | तुम परिपूर्ण आदि भवानी मां सब घट तुम आप बखानी

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श्री गंगा जी की आरती

ॐ जय गंगे माता, श्री गंगे माता | जो नर तुमको ध्यावता, मनवंछित फल पाता | चन्द्र सी ज्योत तुम्हारी जल निर्मल आता | शरण पड़े जो तेरी, सो नर

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श्री जुगलकिशोर जी की आरती

आरती जुगलकिशोर कि कीजै | तन मन धन न्यौछावर कीजै | रवि शशि कोटि बदन कि शोभा | ताहि निरखि मेरी मन लोभा | गौर श्याम मुख निखरत रीझै |

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रानी सती जी की आरती

जय श्री रानी सती मैया, जय श्री रानी सती | अपने भक्त जनों की दूर करने विपत्ति || जय अवनि अनवर ज्योति अखंडित मंडित चहुँ कुकुमा | दुर्जन दलन खंग

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श्री श्याम जी की आरती

ओम् जय श्री श्याम हरे, प्रभु जय श्री श्याम हरे | निज भक्तन के तुमने, निज…पूरण काम करे || ओम् जय . गल पुष्पों की माला सिर पर मुकुट धरे

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श्री चिन्तपूर्णी देवी जी की आरती

चिन्तपूर्णी चिन्ता दूर करनी, जन को तारो भोली माँ | काली दा पुत्र पवन दा घोडा, सिंह पर भई असवार, भोली माँ || १ || एक हाथ खड़ग दूजे में

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श्री केदारनाथ जी की आरती

जय केदार उदार शंकर, मन भयंकर दुःख हरम | गौरी गणपति स्कन्द नन्दी, श्री केदार नमाम्यहम् | शैल सुन्दर अति हिमालय, शुभ मन्दिर सुन्दरम | निकट मन्दाकिनी सरस्वती, जय केदार

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श्री अन्नपूर्णा देवी जी की आरती

बारम्बार प्रणाम मैया बारम्बार प्रणाम जो नहीं ध्यावे तुम्हें अमिबके, कहां उसे विश्राम | अन्नपूर्णा देवी नाम तिहारो, लेत होत सब काम || प्रलय युगान्तर और जन्मान्तर, कालान्तर तक नाम

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श्री नैना देवी जी की आरती

तेरा अदभुत रूप निराला, आजा! मेरी नैना माई ए | तुझपै तन मन धन सब वारूं, आजा मेरी नैना माई ए || सुन्दर भवन बनाया तेरा, तेरी शोभा न्यारी |

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श्री चन्द्र जी की आरती

ॐ जय श्रीचन्द्र यती, स्वामी जय श्रीचन्द्र यती | अजर अमर अविनाशी योगी योगपती | सन्तन पथ प्रदर्शक भगतन सुखदाता, अगम निगम प्रचारक कलिमहि भवत्राता | कर्ण कुण्डल कर तुम्बा