आरती संग्रह

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श्री यमुना जी की आरती

ॐ जय यमुना माता, हरि ॐ जय यमुना माता, नो नहावे फल पावे सुख सुख की दाता |ॐ पावन श्रीयमुना जल शीतल अगम बहै धारा, जो जन शरण से कर

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श्री शीतला माता जी की आरती

जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता आदि ज्योति महारानी सब फल की दाता | जय रतन सिंहासन शोभित, श्वेत छत्र भ्राता, ऋद्धिसिद्धि चंवर डोलावें, जगमग छवि छाता | जय

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श्री गीता जी की आरती

करो आरती गीता जी की || जग की तारन हार त्रिवेणी, स्वर्गधाम की सुगम नसेनी | अपरम्पार शक्ति की देनी, जय हो सदा पुनीता की || ज्ञानदीन की दिव्य-ज्योती मां,

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श्री सालासर बालाजी की आरती

जयति जय जय बजरंग बाला, कृपा कर सालासर वाला | टेक | चैत सुदी पूनम को जन्मे, अंजनी पवन ख़ुशी मन में | प्रकट भय सुर वानर तन में, विदित

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श्री कबीर जी की आरती

सुन संधिया तेरी देव देवाकर, अधिपति अनादि समाई | सिंध समाधि अंतु नहीं पाय लागि रहै सरनई || लेहु आरती हो पुरख निरंजनु, सतगुरु पूजहु भाई ठाढ़ा ब्रह्म निगम बीचारै,

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ब्रहस्पतिवार व्रत की आरती

ॐ जय ब्रह्स्पति देवा, जय ब्रह्स्पति देवा | छिन छिन भोग लगाऊ फल मेवा || तुम पूरण परमात्मा, तुम अंतर्यामी | जगत पिता जगदीश्वर तुम सबके स्वामी || ॐ चरणामृत

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श्री साईं बाबा की आरती

आरती श्री साईं गुरुवर की | परमानन्द सदा सुरवर की || जा की कृपा विपुल सुखकारी | दुःख, शोक, संकट, भयहारी || शिरडी में अवतार रचाया | चमत्कार से तत्व दिखाया ||

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श्री प्रेतराज सरकार जी की आरती

जय प्रेतराज कृपालु मेरी, अरज अब सुन लीजिये | मैं शरण तुम्हारी आ गया हूँ, नाथ दर्शन दीजिये | मैं करूं विनती आपसे अब, तुम दयामय चित धरो | चरणों

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आरती गोरख नाथ की

जय गोरख देवा जय गोरख देवा | कर कृपा मम ऊपर नित्य करूँ सेवा | शीश जटा अति सुंदर भाल चन्द्र सोहे | कानन कुंडल झलकत निरखत मन मोहे | गल

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श्री रविदास जी की आरती

नामु तेरो आरती भजनु मुरारे | हरि के नाम बिनु झूठे सगल पसारे || रहउ० नाम तेरा आसानी नाम तेरा उरसा, नाम तेरा केसरो ले छिटकारे | नाम तेरा अंभुला