पूजा एवं व्रत विधि

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पूजा एवं व्रत विधि व्रत कथा

शारदीय नवरात्रि

शारदीय नवरात्री का इतिहास हमारे शास्त्र के अनुसार भगवान राम ने सबसे पहले समुद्र के किनारे शारदीय नवरात्रों की पूजा की शुरूआत की थी। लगातार नौ दिन की पूजा के

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देव प्रबोधिनी एकादशी

देव प्रबोधिनी एकादशी को देव उठान एकादशी भी कहा जाता है। कार्तिक मास के 11वें दिन इसे मनाया जाता है। इस दिन से विवाह और अन्‍य मांगलिक कार्यों की भी शुरुआत

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नागपंचमी की पौराणिक एवं प्रामाणिक कथा

नाग पंचमी क्या है? नाग पंचमी हिन्दुओं का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है। हिन्दू पंचांग में सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता

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गौरी तृतीया व्रत

भगवान शिव और देवी पार्वती की कृपा प्राप्त करने के लिए सौभाग्य में वृद्धि करने वाला गौरी तृतीया व्रत करने का विधान शास्त्रों में बताया गया है। माघ मास की शुक्ल पक्ष की तृतीय के दिन इस

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अक्षय तृतीया

व्रत विधि कहा जाता है कि भगवान गणेश और ऋषि वेद व्यास ने महाकाव्य महाभारत लिखने की शुरूआत भी इसी दिन की थी। इसके अलावा य​ह भी कहा जाता है

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हनुमान जयंती

प्रभु श्री राम के भक्त, संकट मोचन, महावीर, बजरंग बलि हनुमान की महिमा सबसे न्यारी हैं। सूरज को निगलना, पर्वत को उठाकर उड़ना, रावण की सोने की लंका को फूंकना

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रामनवमी व्रत

विज्ञान और इतिहास के नजरिये से देखा जाये तो रामायण और महाभारत दो महाकाव्य हैं और भगवान राम और भगवान श्री कृष्ण इन महाकाव्यों के नायक। लेकिन धर्म, आस्था और

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चैत्र नवरात्रि व्रत-पूजन का विधान

व्रत की कथाः- माँ दुर्गा द्वारा रक्तबीज, महिषासुर आदि दैत्यों का वध आदि शक्ति माँ दुर्गा की जयकार और भक्त तथा देवगणों की रक्षा व कल्याण। इसी कल्याण के उद्देश्य

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संकष्टी चतुर्थी

संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश की पूजा का विशेष दिन होता है। हिंदू पंचाग के अनुसार ये संकष्टी हर माह कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के चौथे दिन आती है। शुक्ल

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कमला एकादशी व्रत

पद्म पुराण के अनुसार पुरुषोत्तम मास यानि अधिक मास में कमला एकादशी  किया जाता है। वैसे तो एकादशी व्रतों की संख्या 24 है, लेकिन मलमास या अधिक मास होने के