प्रमुख भक्त

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प्रमुख भक्त

भक्त रहीम जी

भूमिका: अब्दुल रहीम खानखाना का नाम हिन्दी साहित्य जगत में महत्वपूर्ण रहा है| इनका नाम साहित्य जगत में इतना प्रसिद्ध है कि इन्हें किसी परिचय की आवश्यकता नहीं है| परिचय:

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भाई सुजान जी

मंनै पावहि मोखु दुआरु || मंनै परवारै साधारु || मंनै तरै तारे गुरु सिख || मंनै नानक भवहि न भिख || ऐसा नामु निरंजनु होइ || जे को मंनि जाणै

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भक्त अंगरा जी

जिसने ईश्वर कर नाम सिमरन किया है, यदि कोई पुण्य किया है, वह प्रभु भक्त बना ओर ऐसे भक्तों ने सातगुरु जी नानक dev जी का यश गान किया है| अंगरा

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संत तुलसीदास जी

भूमिका: श्रीमद्भागवत के बाद दूसरे स्थान पर भारतीय जन मानस को सबसे अधिक प्रभावित करने वाला ग्रंथ रामचरितमानस ही रहा है| ये दोनों ग्रंथ ही सर्वाधिक लोकप्रिय रहे हैं| राम

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साखी गरुड़ की

पुरातन काल में एक ऋषि कश्यप हुए हैं, वह गृहस्थी थे तथा उनकी दो पत्नियां थीं – बिनता और कदरू| कदरू के गर्भ में से सांप पैदा होते थे जिनकी

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गजिन्द्र हाथी

 हाथी एक पल प्रभु का सिमरन किया तो उसकी जान बच गई| परमेश्वर के नाम की ऐसी महिमा है| पशु-पक्षी जो भी नाम सिमरन करता है उसका जीवन सफल हो

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गौतम मुनि और अहल्या की साखी

प्राचीन काल से भारत में अनेक प्रकार के प्रभु भक्ति के साथ रहे हैं| उस पारब्रह्म शक्ति की आराधना करने वाले कोई न कोई साधन अख्तयार कर लेते थे जैसा

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माई सरखाना जी

मान सरोवर हंसला खाई मानक मोती | कोइल अंब परीत है मिठ बोल सरोती | चंदन वास वणासपति हुइ पास खलोती | लोहा पारस भेटिए हुइ कंचन जोती | नदीआं

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भक्त ध्रुव जी

परिचय: भक्त ध्रुव जी का जन्म राजा उतानपाद के महल में हुआ| राजा की दो रानियाँ थी| भक्त ध्रुव की माता का नाम सुनीती था| वह बड़ी धार्मिक, नेक व

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भक्त सैन जी

परिचय: श्री सैन जी के जन्म व परिवार के विषय में कुछ विशेष जानकारी प्राप्त नहीं होती| परन्तु इतना अवश्य कहा जा सकता है कि वह जाति से नाई थे|