सोलह संस्कार

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सोलह संस्कार

विवाह संस्कार

सामाजिक विज्ञान में किसी भी समाज की प्राथमिक ईकाई परिवार को माना जाता है। परिवार का निर्माण या कहें परिवार का आरंभ मनुष्य की एक ऐसी अवस्था से होता है

सोलह संस्कार

समावर्तन संस्कार

जातक के शिक्षा आरंभ करने के लिये दसवां संस्कार उपनयन किया जाता है जब जातक की शिक्षा पूरी हो जाती है तो उसके श्मश्रु यानि दाड़ी सहित सिर के केश

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केशांत संस्कार

 हिंदू धर्म में ग्यारहवां संस्कार केशांत किया जाता है। आइये जानते हैं केशांत संस्कार के महत्व व इसकी विधि के बारे में। केशांत संस्कार क्या है जैसा कि नाम से

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वेदारंभ संस्कार

सनातन अथवा हिन्दू धर्म की संस्कृति संस्कारों पर ही आधारित है। हमारे ऋषि-मुनियों ने मानव जीवन को पवित्र एवं मर्यादित बनाने के लिये संस्कारों का अविष्कार किया। धार्मिक ही नहीं वैज्ञानिक दृष्टि

सोलह संस्कार

उपनयन संस्कार – यज्ञोपवीत

उपनयन या कहें यज्ञोपवीत या विद्याध्ययन आरंभ करने का संस्कार भी कह सकते हैं। हिंदू धर्म में यह बहुत ही महत्वपूर्ण संस्कार है। सोलह संस्कारों में इसे दसवां संस्कार कहा

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कर्णवेध संस्कार

हिंदू धर्म में संस्कारों की महत्ता जातक के जन्म लेने की प्रक्रिया के आरंभ से लेकर अंत्येष्टि तक चलती रहती है। विभिन्न शास्त्रों के अनुसार संस्कार भी कई प्रकार के

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चूड़ाकर्म संस्कार – मुंडन

हिंदू धर्म के संस्कारों में हम अपने पाठकों को अब तक सात संस्कारों की जानकारी दे चुके हैं। सोलह प्रमुख संस्कारों में से गर्भाधान से लेकर अन्नप्राशन तक सात संस्कार

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अन्नप्राशन संस्कार

एक बहुत ही प्रचलित कहावत है कि जैसा खाये अन्न वैसा होगा मन यानि हम जिस प्रकार का अन्न यानि भोजन ग्रहण करते हैं हमारे विचार हमारा व्यवहार भी उसी

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निष्क्रमण संस्कार

हिंदू धर्म में जातक के जन्म से लेकर मृत्यु तक कई संस्कार किये जाते हैं। मुख्यत: सोलह संस्कार जीवन पर्यंत किये जाते हैं। पहला संस्कार गर्भधारण के दौरान किया जाता

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नामकरण संस्कार

नाम में क्या रखा है? अपने नाटक में रोमैंटिकता लाने के लिये शेक्सपियर ने ये बात लिख तो दी कि नाम में क्या रखा है लेकिन वे इस बात पर