श्री गांघी जी का भजन

श्री गांघी जी का भजन

उठ जाग मुसाफिर भोर भई,
अब रैन कहाँ जो सोवत है |

जो जागत है सो पावत है,
जो सोवत है सो खोवत है |

टुक नींद से अंखियाँ खोल जरा,
और अपने प्रभु से ध्यान लगा |

यह प्रति करन की रीत नहीं,
प्रभु जागत है तू सोवत है |

जो कल करना सो आज कर ले,
जो आज करना सो अब कर ले |

जब चिड़ियों ने चुग खेत लिया,
फिर पछ्ताये क्या होवत है |

नादान भुगत करनी अपनी,
अय पापी पाप में चैन कहाँ |

जब पाप की गठरी सीस धरी
फिर सीस पकड़ क्योँ रोवत है |

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