हिन्दुत्व का लक्ष्य पुरुषार्थ है

हिन्दुत्व का लक्ष्य पुरुषार्थ है

हिन्दू धर्म में पुरुषार्थ से तात्पर्य मानव के लक्ष्य या उद्देश्य से है। पुरुषार्थ = पुरुष+अर्थ अर्थात मानव को क्या प्राप्त करने का प्रयत्न करना चाहिये। प्रायः मनुष्य के लिये वेदों में चार पुरुषार्थों का नाम लिया गया है- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष।

पुरुषार्थ का अर्थ 
धर्म का मतलब सदाचरण है। अर्थ का मतलब धनोपार्जन। काम का मतलब विवाह, काम, प्रेम आदि। और मोक्ष का मतलब होता है मुक्ति पाना व आत्म दर्शन। धर्म का ज्ञान होना जरूरी है तभी कार्य में कुशलता आती है कार्य कुशलता से ही व्यक्ति जीवन में अर्थ या जीवन जीने के लिए धन अर्जित कर पाता है। काम और अर्थ से इस संसार को भोगते हुए इन्सान को मोक्ष की कामना करनी चाहिए।

मध्य मार्ग का अर्थ 
इसी प्रकार हिन्दू धर्म की दृष्टि में मध्य मार्ग ही सर्वोत्तम है। हिन्दुत्व धर्म में गृहस्थ जीवन ही परम आदर्श है और संन्यासी का अर्थ है सांसारिक कार्यों व सम्पत्ति की देखभाल एक दासी के रूप में करना। अकर्मण्यता, गृह-त्याग या पलायनवाद का संन्यास से कोई प्रत्यक्ष सम्बन्ध नहीं है। आजीवन ब्रह्मचर्य भी हिन्दुत्व का आदर्श नहीं है क्योंकि हिंदुत्व धर्म में काम पुरुषार्थ का एक अंग है। मनुष्य को गृहस्थ रहते हुए भी अपने आचरण व व्यवहार में ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।

सनातन धर्म में माना जाता है कि ईश्वर एक है लेकिन उसके नाम अनेक हैं। ऋग्वेद के अनुसार ईश्वर एक ही है लेकिन अपने कर्ताभाव के अनुसार वह अलग- अलग नामों से जाने जाते हैं जैसे कि-

नाम अनेक 

सृष्टिकर्ता रूप में ईश्वर को ब्रह्मा कहा जाता है।
* विद्या की देवी को माता सरस्वती के नाम से जाना जाता है।
* सर्वत्र व्याप्त या जगत का पालन करने श्री विष्णु हैं।
* समस्त धन-सम्पत्ति और वैभव की देवी लक्ष्मी हैं।
* रुद्र यानि शिवजी संहारक हैं।
* जिस रूप में ईश्वर समस्त शक्ति को पाते हैं उसे दुर्गा जी कहते हैं।
* सामूहिक बुद्धि का परिचायक गणेश है।
* पराक्रम का भण्डार स्कंद है।
*जिस रूप में ईश्वर आनन्ददाता है, मनोहारी है उसका नाम राम है।
* धरती को शस्य से भरपूर करने वाले ईश्वर का नाम सीता है।
* सबको आकृष्ट करने वाले, अभिभूत करने वाले रूप में उसका नाम कृष्ण है।
* सबको प्रसन्न, सम्पन्न और सफलता दिलाने वाले ईश्वर का नाम राधा है।

रूप है एक 

ईश्वर के चाहे नाम कितने भी हो लेकिन उनका रूप एक ही है। कई जगह हिन्दू धर्म में आदि शक्ति मां दुर्गा को सर्वोपरि माना गया है। वेद पुराणों में इस तथ्य को लिखा भी गया है कि धरती को संभालने वाले त्रिदेव भी दुर्गा जी की आराधना करते हैं।