हिन्दुत्व का लक्ष्य स्वर्ग-नरक से ऊपर

हिन्दुत्व का लक्ष्य स्वर्ग-नरक से ऊपर

हिन्दुत्व का लक्ष्य स्वर्ग नरक से ऊपर उठकर मोक्ष की प्राप्ति करना है। अलग-अलग धर्मों में स्वर्ग नरक को लेकर अपनी- अपनी अलग धारणाएं हैं। हिन्दू धार्मिक ग्रंथों में लिखा गया है कि पुण्य करते रहने से स्वर्ग की प्राप्ति होगी जहां हमें हमारे कर्मों के हिसाब से फल मिलेगा और पाप करने से नरक में ढकेल दिया जाता है जहां अलग-अलग गुनाह की अलग- अलग सजाएं, यातनाएं दी जाएंगी।

स्वर्ग और नरक की धारणा 

हिन्दू धर्म के अनुसार मनुष्य का स्वर्ग और नर्क यहीं है। वह जैसा कर्म करेगा उसका पश्चाताप उसे इस जीवन में इसी धरती पर ही करना पड़ेगा। यह धरती ही मनुष्य का स्वर्ग है और नरक भी। हिन्दू मान्यता के हिसाब से आत्मा अमर होती है यानि केवल शरीर मरता है लेकिन आत्मा नए जीवन के लिए भटकती रहती है।

पुनर्जन्म की धारणा 

यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु समय से पहले हो जाए और उसकी कोई इच्छा अधूरी रह जाए तो अपनी अतृप्त कामना की पूर्ति के लिए उसका पुनर्जन्म होता है। इसी प्रकार यदि किसी व्यक्ति ने बुरे कर्म ज्यादा किए हों और उसकी मृत्यु हो जाए तो अपने कर्मों को भोगने के लिए भी उसका पुनर्जन्म होगा।

मोक्ष की प्राप्ति 

किंतु यदि कोई व्यक्ति इस संसार की मोह-कामना से पूर्ण उठ गया हो और दुनिया से संन्यास लेकर वह केवल भगवान के लीन रहा हो तो उसे मोक्ष प्राप्त हो जाता है। कई जगह इसे मुक्ति भी कहा गया है।

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