जन्म कुंडली

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समय एक सा नहीं रहता है | ग्रह-नक्षत्र बदलते रहते हैं,और परिस्थितियाँ भी |दशाएँ अपना प्रभाव दर्शाती हैं,तो आकाश में भ्रमण करने वाले ग्रह भी|जन्म-कुण्डली तो एक स्थूल रूप है आपके जीवन का समय-समय पर आप ज्योतिष की सलाह लेकर के कुण्डली के ग्रह-दोष के कारण नौकरी व व्यापार मे आने वाली कठिनाइयाँ,परेशानियाँ पति-पत्नी में अनबन ,विवाह व प्रेम-प्रसंग में बाधा मांगलिक दोष,कालसर्प-दोष,पितृ-दोष शनि,राहु-केतु से पीड़ित,विदेश यात्रा,कोर्ट-कचेहरी में विजय आदि सभी समस्यों का शास्त्रीय विधि-विधान से जैसे :-रत्नं धारण,ग्रहों का दान,हवन,पूजन पाठ,ग्रहों के सिद्धि यन्त्र एवं आँयल,ग्रहों के मन्त्र जाप,रुद्राक्ष तथा वैदिक कर्म – काण्ड के द्वारा ग्रहों के दुष्प्रभावो को आसान उपायों के द्वारा कम तो कर ही सकते है|

ज्योतिष के कई महायोग है जो व्यक्ति को जीवन की बुलन्दियों पर पहुँचा देते हैं तो दुर्योग भी है,जो व्यक्ति की भरपूर मेहनत को सफल नहीं होने देते हैं|समय पर इन्ही योगों को जानकर उपाय कर सकते हैं |प्राय: व्यक्ति अपनी एवं पत्नी,सन्तान की जन्म -कुण्डली बनवाने में जागरूक नहीं रहते|समय पर जन्म-कुण्डली बनवाकर भविष्य के प्रति जागरूक बनें |

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