केतु के द्वादश भावों में शुभ-अशुभ के आम उपाय

केतु के द्वादश भावों में शुभ-अशुभ के आम उपाय

1. गणेश पुजा या गणेश चतुर्थी का व्रत करना, दहेज़ में दो चारपाईयां (पलंग) और सोने की अंगूठी जरूर लेना।
2. कपिला गाय का दान देना या सेवा करना, गौशाला में चारा आदि देना।
3. तिल, नींबू, केला आदि दान देना या जल प्रवाह करना।
4. नवार-सुतड़ी (चारपाई बुनाने के लिए) पड़ी हो तो उसकी चारपाई बुनवा लें या खोलकर जल प्रवाह कर दे।
5. कुत्ते (काले-सफेद) को भोजन का हिस्सा देना या कुत्ता (काला-सफेद) पालना।
6. दोरंगा पत्थर या होलदरी पहनना।
7. चाल-चलन ठीक रखना।
8. लड़कों (9 वर्ष से छोटे) की सेवा करना।
9. खटाई वाली चीज़ें (नींबू, इमली या गोल गप्पे) कन्याओं (9 वर्ष से छोटी) को खिलाना।
10. काला-सफेद कम्बल का धर्म स्थान में संकल्प दान देना या काले-सफेद कम्बल का टुकड़ा शमशान में
दबाना।
11. काले और सफेद तिल जल प्रवाह करना।
12. नपुंसकता के समय सोने का कुश्ता, चांदी का कुश्ता, फौलाद का कुश्ता, वंग भस्म, मछली का तेल या तिला
आदि बाजीकरण औषधियों का प्रयोग करना किसी वैद्य की सलाह से।
13. केतु उच्च हो तो राहु की चीज़ों का दान न देना।
14. केतु नीच हो तो राहु की चीज़ों का दान न लेना।
नोट- उपरोक्त उपाय 43 दिन या सप्ताह या माह लगातार करने चाहिए।

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