कुंडली मिलान

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  1. क्या आप जानना कहते हैं ?
  2. ससुराल से सम्बन्ध कैसे रहेगे ?
  3. अष्टकूट-गुण कितने मिलते हैं ?
  4. मांगलिक निष्कर्ष क्या है ?
  5. दोनों के जीवन में स्वास्थ्य ,धन सन्तति-सुख कैसा रहेगा ?
  6. कि आपके पुत्र/पुत्री का होने वाला वैवाहिक सम्बन्ध  कैसा रहेगा ?
  7. जिससें  कि आप सावधान रहें,और अच्छे सम्बन्ध का सही  निर्णय लेकर और अधिक जीवन सफल बना सकें|

            

कन्या के माता पिता को अपनी पुत्री की शादी के सम्बन्ध में सबसे अधिक चिंता रहती है | कन्या भी अपने भावी जीवन, पति, ससुराल एवं उससे सम्बन्धित अन्य विषयों को लेकर फिक्रमन्द रहती है |ज्योतिषशास्त्र के अनुसार कन्या कि कुण्डली का विश्लेषण सही प्रकार से किया जाये तो सभी विषयों को पूरी जानकारी प्राप्त  की जा सकती है|

जीवनसाथी :-
कन्या कि शादी में सबसे अधिक चिंता उसके होने वाले पति के विषय में होती है कि वह कैसा होगा, सप्तम भाव और सप्तमेश विवाह में महत्वपूर्ण होता है | ज्योतिषशास्त्र के अनुसार सप्तम भाव में शुभ ग्रह यानि चन्द्र , गुरु शुक्र या बुध हो अथवा ये ग्रह सप्तमेश हो अथवा इनकी शुभ द्रष्टि इस भाव पर होने पर कन्या का होने वाला पति कन्या कि आयु से सम यानि आस पास होता है , यह दिखने में सुन्दरहोता है , सूर्य मंगल , शनि अथवा राहु , केतु सप्तम भाव में हो अथवा इनका प्रभाव इस भाव पर हो तब वर गोरा और सुन्दर होता है,और कन्या से लगभग 5वर्ष बड़ा होता है,कन्या कि कुण्डली में सूर्य अगर सप्तमेश है,तो यह संकेत है कि पति सरकारी  क्षेत्र से सम्बन्धित होगा ,चन्द्रमा सप्तमेश होने पर पति मध्यम कदकाठी का और शान्ति चित होता है.  सप्तमेश मंगल होने पर पति बलवान परन्तु स्वभाव से क्रोधी होता है| मध्यम कदकाठी का ज्ञानवान और पुलिस या अन्य सरकारी क्षेत्र में कार्यरत होता है| सप्तम भाव में शनि अगर उच्च राशि का होता है तब पति कन्या से कभी लम्बा एवं पतला होता है,नीच का शनि होने पर पति साँवला होता है |

जीवन साथी की आयु :-
लड़की की जन्मपत्री में द्वितीय भाव को पति की आयु का घर कहते है इस भाव का स्वामी शुभ स्थित में होता है,अथवा अपने स्थान से दूसरे स्थान को देखता है,तो पति दीर्घायु होता है,जिस कन्या के द्वितीय भाव में शनि स्थित हो या गुरु सप्तम भाव स्थित हो एवं द्वितीय भाव को देख रहा हो वह स्त्री भी सौभाग्यशाली होती है,यानि पति की आयु लम्बी होती है |

शादी की उम्र :-

               कन्या जब बड़ी होने लगती हैं तब माता पिता इस बात को लेकर चिन्तित होने लगते हैं कि कन्या की शादी कब होगी,ज्योतिषशास्त्र की द्रष्टि से कन्या की लग्नकुण्डली में सप्तम भाव का स्वामी बुध हो और वह पाप ग्रहों से पीड़ित नही हो तो कन्या की शादी किशोरावस्था पार करते करते हो जाती है|सप्तम भाव में सप्तमेश मंगल हो और वह पाप ग्रहों से प्रभावित है तब भी शादी किशोरावस्था पार करते करते हो जाति है,शुक्र ग्रह युवा का प्रतीक है|सप्तमेश अगर शुक्र हो और वह पाप ग्रहों से द्रष्टि हो तब युवावस्था में प्रवेश करने के बाद कन्या की शादी हो जाती है, चन्द्रमा के सप्तमेश होने से किशोरावस्था पार कर कन्या जब यौवन के दहलीज पर कदम रखती है तब एक से दो वर्ष के अन्दर विवाह होने की सम्भावना प्रबल होती है, सप्तम भाव में बृहस्पति अगर सप्तमेश होकर स्थित हो और उस पर पापी ग्रहों का प्रभाव नही हो तब विवाह सामान्य उम्र से कुछ अधिक आयु में सम्भव  है|

इस वर बधू कुण्डली -मिलान के लिए निम्न सुचनाएँ भेजे :-

लिंग *