लाल किताब आधारित दोष एवं उसके उपाय

लाल किताब आधारित दोष एवं उसके उपाय

भारतीय ज्योतिष में फलकथन की अनेक पद्धतियां हैं जिनमें लाल किताब पद्धति सर्वाधिक प्रचलित है। उत्तर
भारत में विशेषकर पंजाब पं्रात में लाल किताब अधिक लोकप्रिय हुई। इसमें वर्णित सहज सरल उपाय इसकी
लोकप्रियता के मुख्य कारण हैं। आज की जीवन शैली में ये उपाय कुछ अजीब तो लगते हैं परंतु उपयोगी व
फलदायक हैं।
वर्तमान समय में प्रचलित लाल किताब के रचयिता श्री रूपचंद जोशी हैं, जिन्होंने 1939 में फारसी में लिखी गई
ज्योतिष फलकथन की एक किताब का उर्दू में अनुवाद किया और लाल किताब के नाम से छपवाया। सन् 1952
तक इसके अनेक संस्करण छपे जिनमें से कुछ मुख्य हैं- लाल किताब गुटका, लाल किताब फरमान, लाल किताब
अरमान, लाल किताब लग्न कुंडली व लाल किताब वर्ष फल कुंडली। मूल उर्दू की लाल किताब में 1172 पृष्ठ हैं
जिसके विभिन्न अंशों को लेकर विभिन्न लेखकों ने विभिन्न रूपों में ‘लाल किताब’ की रचना की है जो बाजार में
उपलब्ध हैं।
लाल किताब के अनुसार सूर्य देव ही ज्योतिष के आचार्य हैं, उन्हीं से सारा बह्मांड प्रकाशमय है। उनके बिना जीवन
असंभव है। जीवन में आए या आने वाले कष्टों से मुक्ति के उपायों से युक्त तथा ताम्र वर्ण (लाल रंग) वाले सूर्य
देव द्वारा रचित ग्रंथ को लाल किताब नाम दिया गया। इसके अनुसार ज्योतिष कोई जादू टोना नहीं है बल्कि अपने
पूर्वजन्म या इस जन्म के बुरे कर्मों से मिल रहे कष्टों से मुक्ति दिलाने का माध्यम है।
लाल किताब में ग्रहों को विभिन्न संज्ञाएं दी गई हैं जैसे सोया ग्रह, जागा ग्रह, धर्मी ग्रह, अधर्मी ग्रह, अंधा ग्रह,
मंदा ग्रह, नेक ग्रह, किस्मत जगाने वाला ग्रह, पक्के भाव का ग्रह, कायम ग्रह, नपुंसक ग्रह आदि। अनुवादित लाल
किताब में भी अधिक शब्द उर्दू व फारसी के हैं। इनके साथ-साथ अंगे्रजी, पंजाबी व संस्कृत के शब्दों का भी
उपयोग किया गया है। हिंदू देवी देवताओं व वृक्षों के नाम भी लाल किताब में मिल जाते हैं। लाल किताब में वर्ष
कुंडली को विशेष महत्व दिया गया है। इसके अतिरिक्त पूर्व जन्म के ऋण व उनके उपाय भी बताए गए हैं। वहीं
विभिन्न ग्रहों व राशियों की स्थितियों के अनुसार शरीर व आत्मा को मिलने वाले कष्टों को विभिन्न उपायों से दूर
करने की विधि भी दी गई है।

Categories: उपाय

Write a Comment

Your e-mail address will not be published.
Required fields are marked*


*