मृत्युन्जय मन्त्र जाप

Back to homepage मृत्युन्जय मन्त्र जाप

ऊँ हौं ऊँ जूं सः  भूर्भुव स्वः |

ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे  सुगंन्धिं पुष्टिवर्धनम् |

उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय  माऽमृतात्  भूर्भुव स्वरों जूं सः हौं ऊँ ||

महामृत्युन्जय मन्त्र का जाप सवा लक्ष सँख्या में सामान्यतः किसी योग्य विद्वान से करवाना चाहिए|उसके बाद दशाँश हवन,मार्जन,तर्पण,ब्राह्मण भोजन करके  महामृत्युन्जय भगवान की कृपा प्राप्त की जा सकती है|और अपमृत्य से प्राणी को बचाया जा सकता है |

ऊँ म्रत्युन्जय महारूद्र त्राहि मां शरणागतम्|

जन्ममृत्युजरारोगैः पीडितं कर्म बन्धनैः||

मन्त्र ज़प के सामान्य नियम :-
जाप के लिए जहाँ तक सम्भव हो एक स्थान निष्चित कर लें|उस स्थान पर जितनी अधिक शुद्धता और पवित्रता रहेगी,उतना ही अधिक जप में मन लगेगा|वातावरण शान्ति पूर्ण हो,इसके लिए प्रातः कल का समय उत्तम माना गया है|और समय की नियमितता भी आवश्यक है|शौच स्नानादि से निवृत होकर के धुले हुए वस्त्र पहने|कम्बल या ऊन का आसन बिछा लें| शिव जी के अमृतरूप का ध्यान करें | जप की संख्या नियत कर लें|प्रतिदिन नियमित संख्या में जप करना शास्त्रविहित है, स्वयं को अनुशासन में रखकर जप करने से विघ्नों को सहन करने की सकती आती है|जप संख्या जानने के लिए रूद्राक्ष माला या कर माला प्रयोग करें|जप के लिए निश्चित मन्त्र का प्रयोग करें|मन्त्र का उच्चारण कंठस्थ, शुद्ध  हो,गुप्त रूप से जप करना लाभप्रद है|जप के समय मन को स्थिर करने का प्रयास करें|भगवान के स्वरूप और मन्त्र के अर्थ का चिन्तन करना उत्तम है|माला से खट-खट   की आवाज  न हो|एक-एक मन्त्र पूरा होने पर एक-एक मनका फिरायें|मन्त्र बोलते समय होठों को हिलाना ,बात करना अनुचित है|ज़प पूरा होने के बाद पुनः प्रभु का ध्यान करके “श्री महामृत्युन्जयदेवतार्पणमस्तु ” कह कर जल छोड़ दें|आसन के नीचे भूमि वन्दना करके वहाँ की मिट्टी को मस्तक पर लगाने का भी विधान है |

उपासना का महत्व :-
सच्ची श्रद्धा तथा विश्वास से युक्त उपासना करने से हृदय में शान्ति और सम्पूर्ण कामनाएँ जो कल्याण करने वाली हों,शीघ्र ही पूर्ण हो जाती हैं|दुःखों के स्थान पर सुखों का आनन्दप्राप्त होता है|और मनुष्य समृद्धियों के और सफलताओं के साथ परमात्मा के आशीर्वादों को प्राप्त करता है|जो प्रतिदिन महामृत्युन्जय मन्त्र का जाप करता है|उसके सभी रोग नष्ट  हो जाते है|तथा वह दीर्घायु प्राप्त करता है |

                        मृत्युन्जयजपं नित्यं यः करोति दिने दिने | 

                        तस्य रोगाः प्रणश्यन्ति दीर्घायुश्च प्रजायते ||

विशेष :- अन्य कोई भी जाप अनुष्ठान हेतु सम्पर्क कर सकते है |

लिंग *