मंत्र

Back to homepage

शक्ति हेतु (हनुमान मन्त्र)
|| ॐ हं हनुमते नमः ||

 


शिव पंचाक्षर मन्त्र
|| ॐ नमः शिवाय ||

 


वित्तीय समृध्धि हेतु (नारायण मंत्र)
|| ॐ नमो नारायणाय ||


ज्ञान की प्रसिद्धी के लिए
|| ॐ एं ह्रीं श्रीं वाग्देव्यै सरस्वत्यै नमः ||



स्त्रियों में मतर्भाव हेतु
विद्याः समस्तास्तव देवी! भेदा
स्त्रियः समस्ताः सकला जगत्सु |
त्वयैकया पुरितमम्बयैतत का
ते स्तुतिः स्तव्यपरा परोक्तिः ||


विद्या प्राप्ति हेतु
|| ॐ एं महासरस्वत्यै नमः ||

 

 


महायक्षिणये
|| ॐ नमो महायक्षिणये मम पति में वशं कुरु – कुरु स्वाहः ||

 


सुंदर वर की प्राप्ति के लिए
ॐ कात्यायनि महामाये महयोगिन्यधिश्वरी |
नन्दगोपसुते देवी! पतिम् में कुरु ते नमः||




मनवानक्षित पति प्राप्त करने हेतु
हे गौैरि शंकरार्धंगि! यथा त्वं शंकरप्रिय्रया।
तथा मां कुरु कल्याणि! कान्तकांतां सुदुर्लर्भ्भाम्।।


मनोकामनाओ की पूर्ति हेतु
|| ॐ ह्रीं बं बटूकय आपदुद्धानाय कुरु कुरु बटुका्य ह्रीं ||

 

 


शत्रुओं के नाश हेतु
|| ॐ ह्लीं बंगलामुखी सर्वदुस्तानाम वाचं मुखं पद्म स्तम्भयं जिह्वाम
कीलय वुद्धिय विनाशय ह्लीं ॐ ||

 


सिद्धि ले लिए
|| ॐ बं बटुक भैरवाय नमः ||

 




सर्वजन वशीकरण
ॐ महामाया हरेश्चैषा तथा सम्मोहते जगत् |
ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती हि सा ||

 


विश्वव्यापी विपत्ति के निवारण के लिए
देवी प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद
प्रसीद मतार्जग्तोखिलस्य |
प्रसीद विश्वेश्वरी पाहि विश्वं
त्वमीश्वरी देवी चराचरस्य ||

 


मुक्ति हेतु मन्त्र
|| ॐ विधेहि देवी कल्याणं , विधेहि परमां श्रीयम |
रूपं देहि , जयं देहि , यशो देहिद्विशोजही ||

 


शक्ति प्राप्ति हेतु
ॐ स्रष्टिस्थिति विनाशानाम शक्ति भूते सनातनी |
गुनाष्ये गुणमये नारायणी नमोस्तु ते ||

 




सुरक्षा प्राप्ति हेतु
शूलेन पाहि नो देवी खद्गेंचाम्विके |
रूपं देहि , जयं देहि , यशो देहिद्विशोजही ||

 


समस्या निदान हेतु
शास्नागत दीनार्त परित्त्त्राण परयने |
सर्वास्यार्ती हरे देवी, नारायणी नमोस्तु ते ||

 


भय निवारण हेतु
सर्वस्वरूपेसर्वेसे सर्व शक्ति समन्विते |
भयेभ्यस त्राहि नो देवी, दुर्गे देवी नमोस्तु ते ||

 


धन-पुत्रादि हेतु
सर्वाबाधा-विनिर्मुक्तो धन-धान्य सुतान्वितः |
मनुष्यों मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः ||

 




सर्व कल्याणार्थ
सर्व मंगल मंगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके |
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोस्तु ते ||

 


दाम्पत्य जीवन की खुशहाली
|| ॐ ह्रीं क्लीं हूँ मातंग्ये फट स्वाहा ||

 


मुक्ति की प्राप्ति हेतु
|| ॐ ह्रीं दूँ दुर्गायै नमः ||

 


सुन्दरता एवं बुद्धुमता हेतु
|| ॐ एं ह्रीं श्रीं क्लीं चामुंडाये विक्चे ||

 



महामारी नाशक
जयंती मगला काली भद्रकाली कपालिनी |
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तु ते ||

 


बाल रोग नाशक
हिनस्ति दैत्यतेजानसी स्वनेनापूर्य या जगत |
सा घंटा पातु नो देवि! पपेभ्योनः सुतानिव ||

 


सौभाग्य और आरोग्यकारक
देही सौभाग्यमारोग्यं देही में परमं सुखं |
रूपं देही, जयं देही, यशो देही द्विषो जही ||

 


रोगनाश के लिए
ॐ रोगानशेषापहसि तुष्टा रुष्टा टू कामान सकलानभिश्टान |
त्वामश्रितानाम न विपन्नारानाम त्वामश्रिता हाश्रयतां प्रयान्ति ||

 




रोगों से मुक्ति
|| ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिमपुष्टिवर्धनम उर्वारुकमिव
बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीयमामृतात् ||

 


मृत्यु भय नाशक
|| ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिमपुष्टिवर्धनम उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीयमामृतात् ॐ स्वः भुवः ॐ सः जूं हौं ॐ ||

 


त्रयक्षर म्रत्युन्जय मन्त्र
|| ॐ हौं जूं सः ||

 


पुत्रप्राप्ति के लिए
देवकिसुत गोविन्द! वासुदेव जगाप्त्ये |
देही में तनयं कृष्ण! त्वामहं शरणं गतः ||

 




सुलक्षन भार्या हेतु
पत्नीं मनोरमां देही, मनोव्रत्तानुसरिणीम् |
तारिणीं दुर्गसंसार सागरस्य कुलोद्भवाम ||

 


शनि हेतु पौराणिक मन्त्र
ॐ नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रयम |
छायामारतंडसंभूतं तं नमामि शनैश्चर ||

 


सौभाग्य और आरोग्यकारक
देही सौभाग्यमारोग्यं देही में परमं सुखं |
रूपं देही, जयं देही, यशो देही द्विषो जही ||

 


सर्वग्रह शांति
ब्रह्ममा मुरारिस्त्रिपुरान्त्कारी
भानुः शशी भूमिसुतो बुधश्च |
गुरुश्च शुक्रः शानिराहूकेतवः
सर्वेग्रह शांति कराभवन्तुः ||

 




केतु (नवग्रह) मन्त्र
|| ॐ श्रा श्रीं सः केतवे नमः ||

 


चंद्र (नवग्रह) मन्त्र
|| ॐ श्रां श्रीं श्रों सः चन्द्रमसे नमः ||

 


विश्वव्यापी विपत्ति  निवारणार्थ

देवी प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद 

प्रसीद मतार्जग्तोखिलस्य|

प्रसीद विश्वेश्वरी पाहि विश्वं

त्वमीश्वरी देवी चराचरस्य ||

 


शनि (नवग्रह) मन्त्र
|| ॐ प्रा प्रीं प्रों सः शनये नमः ||




मंगल हेतु मन्त्र
|| ॐ क्रां क्रीं क्रो सः भौमाये नमः ||

 


सूर्य (नवग्रह) मन्त्र
|| ॐ ह्रां ह्रीं हौं सः सूर्याय नमः ||

 


गुरु (नवग्रह) मन्त्र
|| ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः ||

 


शुक्र स्तुति मन्त्र
|| ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः ||

 




बुध (नवग्रह) मन्त्र
|| ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः ||

 


राहू (नवग्रह) मन्त्र
|| ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः राहवे नमः ||

 


सोम मन्त्र
|| ॐ सोम सोमाय नमः ||

 


शुक्र मन्त्र
|| ॐ शुं शुक्राय नमः ||

 




शनि मन्त्र
|| ॐ सं शनिश्चराय नमः ||

 


राहू मन्त्र
|| ॐ रं राहवे नमः ||

 


केतु मन्त्र
|| ॐ कें केतवे नमः ||

 


सूर्य मन्त्र
|| ॐ ग्रीं सूर्याय नमः ||

 




गुरु मन्त्र
|| ॐ गं गुरुवे नमः ||

 


बुध मन्त्र
|| ॐ बूँ बुधाय नमः ||

 


अंगारकाय मन्त्र
|| ॐ अं अंगारकाय नमः ||

 


लक्ष्मी मन्त्र
|| ॐ या देवी सर्वभुतेसु लक्ष्मी रूपेण सस्थिता |
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ||

 




महालक्ष्मी मन्त्र
|| ॐ श्रीं महालक्ष्मये नमः ||

 


लक्ष्मी आवाहन मन्त्र
|| ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलाले प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मये

नमः ||

 


सुन्दरता हेतु (त्रिपुरसुन्दरी मन्त्र)
|| ॐ श्री श्री ललिता महात्रिपुरसुन्दरिये श्री महालक्ष्मये नमः ||

 

 


लक्ष्मी गायत्री (धन-वैभव)
|| ॐ महा लक्षमये च विद्महे विष्णुपत्नाये च धीमहि | तन्नो! लक्ष्मीः

प्रचोदयात ||

 




कालसर्प मन्त्र
|| ॐ सर्पेभ्यो नमः ||

 


कालसर्प शांति मन्त्र
|| ॐ क्रो अस्तु सर्पेभ्यो कालसर्प शान्ति कुरु कुरु स्वाह ||

 

 


शिव गायत्री (सुरक्षा)
|| ॐ तद्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि | तन्नो! रुद्रः प्रचोदयात ||

 

 


गायत्री मन्त्र
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेंयं |
भर्गोदेवस्य धीमहि धियो योनः प्रचोदयात ||



गणेश मन्त्र
ॐ वक्रतुण्ड महकाया सूर्य कोटि समप्रभा |
निर्विघ्नं कुरू में देव सर्व कर्येसु सर्वादा ||


गणेश बीज मन्त्र
|| ॐ गं गणपतये नमः ||


गणेश गायत्री मन्त्र
ॐ एक दन्ताय विद्महे वक्र्तुन्दाय धीमहि | तन्नो! दन्तिः प्रचोदयात ||


द्वादशाक्षर मन्त्र
|| ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ||