नेत्र व्रत

नेत्र व्रत

नेत्र व्रत चैत्र शुक्ल पक्ष की द्वितीय को रखा जाता है। नारद पुराण के अनुसार इस व्रत के पुण्य से व्यक्ति को ब्रह्मलोक प्राप्त होता है। इस दिन बाल चंद्रमा और भगवान ब्रह्मा की पूजा करने का विधान है।
नेत्र व्रत विधि
नारद पुराण के अनुसार पूरे विधिपूर्वक सप्त अनाज तथा गन्ध आदि से ब्रह्मा जी की पूजा करनी चाहिए। इसी दिन शाम के समय बाल चंद्रमा अर्थात उगते चांद की पूजा करनी चाहिए। पूजा करने के बाद ब्राह्मणों को क्षमता अनुसार सोने या चांदी से बने नेत्र को दान करना चाहिए। इस व्रत में व्यक्ति को दही तथा घी से बना भोजन ही करना चाहिए।
नेत्र व्रत फल
मान्यता है कि नेत्र व्रत करने वाले व्रती की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है। इस दिन चांद की पूजा के फलस्वरूप व्यक्ति जीवन के सभी सुखों को भोग कर मोक्ष को प्राप्त करता है।