पिरामिड

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  • पिरामिड का शाब्दिक अर्थ है ‘सूच्याकार पत्थर का खंभा’ कुछ लोगों ने इसको पिरा एवं मिड में
    संधि विच्छेद कर इसका अर्थ दिया है त्रिकोणाकार ऐसी वस्तु, जिसके मध्य में अग्नि ऊर्जा के स्रोत का निर्माण
    होता है। पिरामिड ‘आकाश तत्व’ के अंतर्गत स्पेस एनर्जी में आता है और उसी हिसाब से घर
    में आकाश तत्व और प्रकाश को बढ़ाने के लिए इसको उपयोग में लिया जाता है।
    पिरामिड कभी ठोस नहीं होता। पिरामिड तो पृथ्वी पर भार है। उनका कोई महत्व नहीं। ऐसे तो बड़े-बड़े तिकोने
    पर्वत पृथ्वी पर खडे़ हैं। उनमें कोई चमत्कार नहीं। पिरामिड का असली संबंध तो अंदर के आकाश तत्व
    एवं उसमें प्रवाहित होने वाली ऊर्जा से है। फिर पिरामिड ज्यामितीय सिद्धांतों एवं वास्तु सिद्धांतों पर खरे उतरने
    चाहिएं। तभी उनमें चमत्कारी शक्ति आएगी। पिरामिड के अंदर गहन शक्ति का अनुभव होता है।
    पिरामिड की ऊर्जा, भूगर्भ के चारों कोनों की चार भुजा से उघ्र्वगामी होती है तथा पिरामिड का शक्ति बिंदु ऊपरी
    नोक की ओर बढ़ता है। उधर सूर्य की ऊर्जा पिरामिड की ऊपरी नोक से नीचे की ओर उतरती है। इस प्रकार
    से पिरामिड ऊर्जा भूगर्भ एवं ऊपर आकाश द्वारा दोनों ओर से संपादित होती है। आयुर्वैदिक, एक्यूप्रेशर, या अन्य
    कोई योग, ध्यान लगाने में पिरामिड बाधक नहीं है। यदि पिरामिड में मंत्रपूत लक्ष्मी यंत्र स्थापित किया जाए और
    उसे तिजोरी, गल्ले के ऊपर रखा जाए, तो चमत्कारी रूप से धन की वृद्धि होती है। यदि यह
    कूर्मपृष्ठीय या मेरूपृष्ठीय हो, तो शत-प्रतिशत काम करता है।
    पिरामिड एक अत्यंत उपयोगी यंत्र है, जो मानव के लिए हर पल हर क्षेत्र में लाभ देता है। यह किसी धर्म संप्रदाय
    से संबंध न रखते हुए निरंतर मानव का कल्याण करता है। इसकी उत्पति पर विचार करने के लिए भले ही हमें
    विश्व इतिहास के प्रारंभिक काल में लौटना पड़े, परंतु यह ध्रुव सत्य है जिसे आज चिकित्सा विज्ञान भी सहजता
    से स्वीकार रहा है। पिरामिड यंत्र स्थूल या सूक्ष्म गतिविधियों को संचालित करने वाले स्नायु को ऐसा प्रभावित
    करता है कि वे चिकित्सा का कार्य करते हैं। यह एक ऐसी बंद अलमारी है जिसके भीतर प्रकृति ने अनेक शक्तियों
    को छिपा रखा है, मानव के लिए आंतरिक एवं बाह्य कार्य क्षमता प्रदान करने के साथ-साथ शरीर में विशेष प्रकार
    की कंपन पैदा करता है, इसके द्वारा मन और मस्तिष्क में निरंतर प्रसन्नता बनी रहती है।
    स्वस्थ्य एवं प्रसन्न रहने के लिए पिरामिड यंत्र अति चमत्कारिक यंत्र है, जिसको वैज्ञानिक आधार प्राप्त है। इस
    यंत्र के उपयोग से मानव शरीर में आवश्यकतानुसार ऊर्जा प्राप्त होती है, यही इसका मूलभूत सिद्धांत है। मनुष्य
    का गुण, अवगुण, कार्य, रुचियां, प्रायः भिन्न होती हैं लेकिन उनकी आवश्यक ऊर्जा एक जैसी ही होती है। इस
    कारण यह सिद्ध हो चुका है कि व्यक्ति चाहे किसी भी श्रेणी का हो उसे पिरामिड यंत्र अवश्य लाभ देगा।
    उपयोग विधि
    पिरामिड का उपयोग अत्यंत सहज है जिसे आप स्वतः कर सकते हैं। सर्व प्रथम इस यंत्र को गंगा जल या पंचामृत
    में धो कर ईशान कोण की ओर किसी आधार (चैकी) पर रखें तत्पश्चात इसकी सूक्ष्म पूजा (धूप दीपादि से) कर
    के इसके अनेक प्रकार के लाभ हेतु उपयोग कर सकते हैं।
    लाभ
    1. किसी भी रोग की औषधि को कुछ घंटे पिरामिड के नीचे रख दें, तत्पश्चात दवा का सेवन करने से दवा का
    प्रभाव द्विगुणित हो जाता है।
    2. इसे गले या भुजा में धारण करने से स्वतः का कम वजन आभास होता है तथा मन प्रफुल्लित रहता है।
    3. किसी भी मंत्रादि का जप करने या पूजा करने के समय सम्मुख रखने से धनात्मक ऊर्जा मिलती है तथा मन
    एकाग्र होता है।
    4. छोटा शिशु रात को सोते समय चैंकता हो या डरता हो, तो उसके विस्तर के नीचे रखने से उसे अच्छी नींद
    आती है और डरावने सपने नहीं आते।
    5. शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों को शिक्षण के समय पिरामिड को टेबल पर सामने रख कर अध्ययन करने से अधिक
    सफलता मिलती है।
    6. यह पिरामिड मनुष्य को आवश्यकतानुसार 1. ब्रह्माण्डीय ऊर्जा, 2. चुम्बकीय ऊर्जा, 3. आणविक ऊर्जा को
    निरंतर प्रदान करता है, जिससे आप स्वस्थ्य और संतुलित रहते हैं।