रत्न-उपरत्न

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नीलम (Sapphire)

Price : 21000 17000

नीलम के स्वामी शनि देवता हैं। ज्योतिष शास्त्र में शनि की दशा दुर्दशा और दुख की द्योतक मानी जाती है। इसलिए शनि के कोप को शांत करने के लिए सहज उपाय नीलम धारण करना माना जाता है। नीलम मकर एवं कुंभ राशि का प्रतिनिधि और सितंबर माह का ग्रह रत्न है। नीलम सत्य और सनातन का प्रतीक है। विवेकशीलता, सत्य तथा कुलीनता जैसे गुण इसके साथ जुड़े हुए हैं। शुभ फलदायक सिद्ध होने पर यह, धारणकत्र्ता के रोग, दोष, दुख-दारिद्रय नष्ट कर के, धन-धान्य, सुख-संपत्ति, बुद्धि, बल, यश, आयु और कुल, संतति की वृद्धि करता है। नीलम धारण करने से स्त्रियों में अनैतिकता नहीं आती। प्रेमियों के लिए यह भाग्यवान रत्न माना जाता है। यह प्रसन्नतावर्धक है, परंतु पापी व्यक्ति को विपरीत फल देता है। नीलम दिलोदिमाग को सुकून देने वाला माना गया है, जो श्वास, खांसी और पित्त की बीमारी को कम करता है। विश्वास यह है कि नीलम को बेच देने के बावजूद वह मूल धारक की रक्षा करता है। नीलम के लिए कहा जाता है कि इसे विषैले सांप के साथ रखने पर सांप मर जाता है। कहते हैं, भूत-प्रेत से छुटकारे में भी नीलम असरकारीहै। यह धारणा भी है कि ईश्वर की इच्छा का संकेत नीलम से प्राप्त होता है और इससे सही भविष्यवाणी संभव है। दुष्ट और अपवित्र व्यक्ति द्वारा पहनने पर नीलम की चमक लुप्त होने की बात भी की जाती है। विष की काट के रूप में नीलम को काफी असरकारक माना गया है। रक्त प्रवाह रोकने में यह श्रेष्ठ मरहम माना जाता है। खूनी नीलम सर्वाधिक असरकारक माना जाता है और सावधानी से धारण करने की हिदायतों के साथ दिया जाता है, क्योंकि कुछ दिन तक धारण करने पर अनिष्ट होना भी संभव है। अतः धारक को सचेत भी रहना पड़ता है। नीलम प्राप्ति स्थल नीलम श्रीलंका, बर्मा, थाईलैंड से उत्तम और प्रचुर मात्रा में प्राप्त होते हैं, परंतु कश्मीर प्रदेश से प्राप्त नीलम सबसे उत्तम होते हैं, जिन्हंे ‘मयूर नीलम’ कहते हैं, क्योंकि इनका रंग मोर की गर्दन के रंग की तरह का होता है। यदि इनमें एक बूंद रंग भी हो, तो संपूर्ण नग रंगीन हो जाता है। कश्मीरी नीलम बिजली के प्रकाश में अपना रंग नहीं बदलता, जबकि अन्य स्थानों से प्राप्त नीलम बिजली के प्रकाश में स्याह रंग के दिखाई देते हैं। तात्विक संरचना नीलम कुरून्दुम समूह का ही एक भंगुर रत्न है। अल्यूमिनियम तथा आक्सीजन के योग से निर्मित यह रत्न कोबाल्ट मिश्रित होने के कारण नीले रंग का दिखाई देता है। माणिक्य भी कुरून्दुम समूह का ही रत्न है, लेकिन नीलम की कठोरता माणिक्य से अपेक्षाकृत कम होती है। नीलम की परख Û असली नीलम धूप में रखा जाये तो नीलम से किरणों का एक फब्बारा जैसा फूटता दिखाई देता है। Û स्वच्छ जल भरे गिलास में डालने पर नीलम से विशेष चमक वाली नीली किरणें निकल कर आंखों में चुभती सी प्रतीत होती हैं। Û असली नीलम में रंगो की पट्टियां वक्री न होकर सीधी दिखाई देती है। Û नीलम हाथ में लेकर देखिये, अपेक्षाकृत हल्का प्रतीत होने वाला नीलम ही असली समझना चाहिए। Û असली नीलम स्पर्श करने से विशेष चिकनाहट का आभास देता है। Û हाथ में लेने पर असली नीलम कठोरता की अनुभूति नहीं देता। असली नीलम मुलायमियत की प्रतीति कराता है। Û एक परीक्षा यह भी है, असली नीलम के पास कोई भी तिनका लाने पर वह नीलम की ओर आकर्षित होकर चिपक जाता है। नीलम के दोष दोषयुक्त नीलम अनुकूल फल प्रदान करने के बजाय घातक परिणाम देता है। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से निम्न दोषों वाला नीलम धारण योग्य नहीं होता। सुन्न- जो नीलम चमक रहित अथवा क्षीण चमक वाला होता है, ऐसे नीलम को सुन्न नीलम कहा जाता है। सुन्न संज्ञक ऐसा नीलम धारण करने योग्य नहीं होता। कहा जाता है, कि ऐसा नीलम धारण करना प्रियजनों के लिए घातक होता है।दोरंगा- श्रेष्ठ नीलम वह होता है जो पूर्णरूपेण एक रंग का हो। रंग विभिन्नता वाला नीलम भी दोषपूर्ण माना गया है। इसे भी नहीं पहनना चाहिए। ऐसा नीलम दाम्पत्य सुख में बाधा कारक माना गया है। क्रास- नीलम में किसी भी प्रकार क्रास जैसा चिन्ह नीलम को धारण योग्य नहीं रखता। ऐसे क्रास-दोष युक्त नीलम को धारण करने वाला व्यक्ति, कंगाल हो जाता है। खड्ड- यदि किसी नीलम में गड्ढा दिखाई दे तो ऐसे नीलम को भी दोषयुक्त समझना चाहिए। ऐसा खड्ड- दोषयुक्त नीलम शत्रु वुद्धि करके शरीर को कष्ट देने वाला बताया गया है। रक्त विन्दु- नीलम में लाल रंग के धब्बे दिखाई दें तो ऐसा नीलम भी धारण योग्य नहीं होता। ऐसा नीलम धारण करने वाले लोग पुत्र-सुख से वंचित होते हैं, और स्वयं भी अस्वस्थ रहते हैं। जालक- किसी नीलम में जाल जैसा गुंथा प्रतीत हो तो ऐसे नीलम को दोषयुक्त समझना चाहिए। इसे धारण करने वाले व्यक्ति विभिन्न रोगों से पीड़ा पाकर कष्ट भोगते हैं। दूधक- जिस नीलम में दूध जैसे धब्बे हों, अथवा जो पूर्णतया दूधिया रंग लिये हो ऐसा नीलम दूधक-दोष से युक्त माना जाता है तथा धारण योग्य नहीं होता। कहा जाता है कि ऐसा नीलम धारण करने से लक्ष्मी का नाश होता है। और धारण करने वाला व्यक्ति दाने-दाने के लिए मोहताज हो जाता है।

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