वसंत पंचमी

वसंत पंचमी

इनके अनेक नाम हैं, जिनमें से वाक्‌, वाणी, गिरा, भाषा, शारदा,वाचा, श्रीश्वरी, वागीश्वरी, ब्राह्मी, गौ, सोमलता, वाग्देवी औरवाग्देवता आदि प्रसिद्ध हैं। मां सरस्वती की कृपा से ही विद्या, बुद्धि, वाणी और ज्ञान की प्राप्ति होती है|  अमित तेजस्विनी व अनंत गुणशालिनी देवी सरस्वती की पूजा-आराधना के लिए माघमास की पंचमी तिथि निर्धारित की गई है।बसंत पंचमी को इनका आविर्भाव दिवस माना जाता है | अतः “वागीश्वरी जयंती” व “श्रीपंचमी” नाम से भी यह तिथि प्रसिद्ध है. साथ ही इसीदिन काम के देवता अनंग का भी आविर्भाव हुआ था | यानी कि इस दिन सम्पूर्ण प्रकृति में एक मादक उल्लास व आनन्द की सृष्टि हुई थी | यहपूजा पूर्वी भारत में बड़े उल्लास से मनायी जाती है | इस दिन स्त्रियाँ पीले वस्त्र धारण करती हैं , शास्त्रों में बसंत पंचमी को ऋषि पंचमी सेउल्लेखित किया गया है, तो पुराणों-शास्त्रों तथा अनेक काव्यग्रंथों में भी अलग-अलग ढंग से इसका चित्रण मिलता है।

ब्राह्मणग्रंथों के अनुसार वाग्देवी, ब्रह्मस्वरूपा, कामधेनु, तथा समस्त देवों की प्रतिनिधि हैं।

 शास्त्रों में भी अष्टाक्षरी मंत्र के रूप में इस प्रकार याद किया गया है।

प्रथमं भारतीय नाम। द्वितीयं तु सरस्वती। तृतीयं शारदा देवी। चतुर्थं हंसवाहिनी। पंचमं जगतीख्याता। षष्टमं माहेश्वरी। सप्तमं तु कौमारी। अष्टमं ब्रम्हचारिणी। नवमं विद्याधीत्रिमि। दशमं वरदायिनी। एकादशं रूद्रघंटा। द्वादशं भुनेश्वरी। एतानी द्वादशों नमामी। य: पटच्छणुयादपि। नच विध्न हवमं तस्य मंत्र सिध्दी कर तथा॥

सरस्वती ने अपने चातुर्य से देवों को राक्षसराज कुंभकर्ण से कैसे बचाया, इसकी एक मनोरम कथा वाल्मिकी रामायण के उत्तरकांड में आती है। कहते हैं देवी वर प्राप्त करने के लिए कुंभकर्ण ने दस हजार वर्षों तक गोवर्ण में घोर तपस्या की।

जब ब्रह्मा वर देने को तैयार हुए तो देवों ने कहा कि यह राक्षस पहले से ही है, वर पाने के बाद तो और भी उन्मत्त हो जाएगा तब ब्रह्मा ने सरस्वती का स्मरण किया। सरस्वती राक्षस की जीभ पर सवार हुईं। सरस्वती के प्रभाव से कुंभकर्ण ने ब्रह्मा से कहा,स्वप्न वर्षाव्यनेकानि। देव देव ममाप्सिनम। अर्थात मैं कई वर्षों तक सोता रहूं, यही मेरी इच्छा है।

ब्राह्मण ग्रंथों के अनुसार वाग्देवी सरस्वती ब्रह्मस्वरूपा, कामधेनु तथा समस्त देवों की प्रतिनिधि हैं। ये ही विद्या, बुद्धि और ज्ञान की देवी हैं। अतः बसंत पंचमी को सभी शुभ कार्यों के लिए अत्यंत शुभ मुहूर्त माना गया है। मुख्यत: विद्यारंभ, नवीन विद्या प्राप्ति एवं गृह प्रवेश के लिए बसंत पंचमी को पुराणों में भी अत्यंत श्रेयस्कर माना गया है।