दुर्भाग्य की दस्तक से पहले ………जगाये अपना भाग्य!

 

वर्तमान समय में 90% लोग कालसर्प ,पितृदोष , राहू-केतु एवं शनि से पीड़ित होने के कारण असफल एवं दुखी हैं ?
कहीं आपके दुर्भाग्य और दुःख का कारण कालसर्प तो नहीं ?
दुःख , दुर्भाग्य और असफलता तथा कारण-निवारण एवं उपचार हेतु शत प्रतिशत सही जनम कुंडली बनवाएं |

एक परामर्श आपका भविष्य बदल सकता हैं |

ज्योतिष के कई महायोग है जो व्यक्ति को जीवन की बुलन्दियों पर पहुँचा देते हैं तो दुर्योग भी है,जो व्यक्ति की भरपूर मेहनत को सफल नहीं होने देते हैं|समय पर इन्ही योगों को जानकर उपाय कर सकते हैं |प्राय: व्यक्ति अपनी एवं पत्नी,सन्तान की जन्म -कुण्डली बनवाने में जागरूक नहीं रहते|समय रहते भविष्य के प्रति जागरूक बनें |

ससुराल से सम्बन्ध कैसे रहेगे ? अष्टकूट-गुण कितने मिलते हैं ? मांगलिक निष्कर्ष क्या है ? दोनों के जीवन में स्वास्थ्य ,धन सन्तति-सुख कैसा रहेगा ?कि आपके पुत्र/पुत्री का होने वाला वैवाहिक सम्बन्ध कैसा रहेगा ?जिससें कि आप सावधान रहें,और अच्छे सम्बन्ध का सही निर्णय लेकर और अधिक जीवन सफल बना सकें|

इस योग में उत्पन्न जातक को मानसिक अशांति , धनप्राप्ति में बाधा , संतान अवरोध एवं गृहस्थी में प्रतिपल कलह के रूप में प्रकट होता है|प्राय:जातक को बुरे स्वप्न आते हैं|कुछ न कुछ अशुभ होने की आशंका मन में बनी रहती है|जातक को अपनी क्षमता एवं कार्य कुशलता का पूर्ण फल प्राप्त नहीं  होता है,कार्य अक्सर देर से सफल होते है|

मंगल दोष को कुछ लोग मांगलिक दोष भी कहते हैं। जिन लोगों को मंगल दोष होता है उनकी शादी में बेहद परेशानियां आती हैं। इस दोष के विभिन्न शास्त्रों में मिलने वाले दुष्परिणामों और चेतावनियों की वजह से आम आदमी में इसे लेकर कई भ्रांतियां भी हैं।मांगलिक स्त्री-पुरुष से विवाह होने पर हमेशा परिणाम अशुभ नहीं होते।

व्रत कथा

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